🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🙏 *#श्रीदादूअनुभववाणी* 🙏
*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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*द्वितीय भाग : शब्द*, *राग गौड़ी १, गायन समय दिन ३ से ६*
साभार ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, राज. ॥
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७७ - गुरु अधीन ज्ञान । दादरा
बाबा गुरु मुख ज्ञाना रे, गुरु मुख ध्याना रे ॥टेक॥
गुरु मुख दाता, गुरु मुख राता , गुरु मुख गवना रे ।
गुरु मुख भवना, गुरु मुख छवना१, गुरु मुख रवना रे२ ॥१॥
गुरु मुख पूरा३ गुरु मुख शूरा, गुरु मुख वाणी रे ।
गुरु मुख देणा, गुरु मुख लेणा, गुरु मुख जाणी रे ॥२॥
गुरु मुख गहबा, गुरु मुख रहबा, गुरु मुख न्यारा रे ।
गुरु मुख सारा, गुरु मुख तारा, गुरु मुख पारा रे ॥३॥
गुरु मुख राया, गुरु मुख पाया, गुरु मुख मेला रे ।
गुरु मुख तेजँ, गुरु मुख सेजँ, दादू खेला रे ॥४॥
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यथार्थ ज्ञान गुरु मुख द्वारा ही प्राप्त होता है, यह कह रहे हैं - हे बाबा ! सभी प्रकार के ज्ञान गुरु मुख से सुनने पर ही होते हैं ।
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गुरु मुख से ही ध्यान का, दाता होने का, प्रभु में अनुरक्त होने का, प्रभु के पास जाने का, अपने अधिष्ठान परब्रह्म रूप घर का, उस घर में स्थिर रूप से रहने१ का, प्रभु से आनँद२ प्राप्त करने का,
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पूर्णावस्था प्राप्त करने का, साधन में वीर रहने का, वाणी बोलने का, उपदेश देने तथा लेने का, ज्ञानी होने का,
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ज्ञान को धारण करने का, स्वस्वरूप में स्थित रहने का, साँसारिक भावनाओं से अलग रहने का, सार तत्व का, सँसार - सिन्धु से तैरने का, सँसार पार की स्थिति का,
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राजा समान निर्पेक्ष रहने का, ब्रह्म प्राप्ति का, हृदय शय्या पर प्रभु की अनुभूति का ब्रह्म प्रकाश, परा भक्ति द्वारा प्रभु से आनँद रूप खेल खेलने और ब्रह्म में अभेद रूप से मिलने का इत्यादि सभी यथार्थ ज्ञान गुरु द्वारा ही होता है ।
(क्रमशः)

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