सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

= सुन्दर पदावली(फुटकर काव्य २.गूढार्थ - १७/१८) =

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॥ श्री दादूदयालवे नमः ॥ 
स्वामी सुन्दरदासजी महाराज कृत - *सुन्दर पदावली* 
साभार ~ महंत बजरंगदास शास्त्री जी, 
पूर्व प्राचार्य ~ श्री दादू आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(जयपुर) व राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय(चिराणा, झुंझुनूं, राजस्थान) 
*= फुटकर काव्य २.गूढार्थ - १७/१८ =* 
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*तरक बुराई बहुत बिधि हैरिप माया जाल ।* 
*नरम होई पल एक मैं करन जाइ तत्काल ॥१७॥* 
जो नाना प्रकार से निन्दा(बुराई) का त्याग करता है । माया मोह का परित्याग करता है । एक क्षण में ‘मरन’(मृत्यु) हो सकती है – ये तीन वाक्य भी तीन प्रतिलोम वर्णों को अनुलोम कर देने से बने हैं ॥१७॥ 
*मरा मना भजिबौ करौ गरा षदो नहिं कोइ ।* 
*ईसो धूसा जानिये हूका पैलि न सोइ ॥१८॥* 
‘राम’ का ‘नाम’ भजो, इससे मन में किसी के प्रति ‘राग’, ‘द्वेष’ उत्पन्न नहीं होता । उसे ही ‘साधु’ समझना चाहिये जो विषय वासना में लिप्त नहीं होता । ये छह(६) शब्द भी प्रतिलोम अक्षरों को अनुलोम कर देने पर बने हैं ॥१८॥
(क्रमशः)

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