मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

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*दादू पूरणहारा पूरसी, जो चित रहसी ठाम ।*
*अन्तर तैं हरि उमग सी, सकल निरंतर राम ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्‍वास का अंग)*
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साभार ~ Tapasvi Ram Gopal
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भाग २* *ईश्वर* 
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.मोहन राणा सरकार के दफ्तरी थे । उनके किसी शत्रु ने उनकी राणा से झूठी शिकायत कर दी, राणाने उसे सत्य मानकर मोहन दफ्तरी के हाथ पैरों में बेड़ियां डालकर एक कोठरी में बन्द कर दिया । मोहनजी ने भगवान से प्रार्थना की, भगवत् कृपा से उनकी बेड़ियां अपने आप खुल गई, फिर वे विरक्त होकर सन्तवर दादूजी के शिष्य हो गये, आगे चलकर वे अच्छे सन्त तथा वाणीकार हुये । इससे ज्ञात होता है कि ईश्वर कृपा से बेड़ियां भी अपने आप खुल जाती है ।
ईश कृपा से बेड़ियाँ, शीध्र आप खुल जाय ।
मोहन दफ्तरी की खुली, भजा ईश मन लाय ॥७६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
### सत्यराम सा ###

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