सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

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*दादू साधु शब्द सौं मिल रहै, मन राखै बिलमाइ ।*
*साधु शब्द बिन क्यों रहै, तब ही बीखर जाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ मन का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *गुरु*
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एक दिन सन्त दादूजी और उनका एक शिष्य सांभरसर में जहां दादूजी की छतरी है, बैठे थे । अधिक वर्षा होने के कारण गांव में जाने का मार्ग रुक गया । दादूजी ने शिष्य(टीलाजी) को कहा - "राम - राम करते मेरे पीछे -पीछे आ जाना । डरना नहीं डूबेगा नहीं ।" वह पीछे -पीछे चला किन्तु मध्य में जाकर उसने संकल्प किया कि मुझे तो राम - राम बताया है और गुरुजी तो कुछ और ही जपते हैं । 
इस संकल्प के होते ही शिष्य डूबने लगा । दादूजी ने देखा तो कहा - "अरे ! राम राम कर, संशय मत कर ।" फिर वह राम राम करने लगा और गुरु के साथ पार हो गया ।
संशय हो गुरु वचन में, बिगड़ जात झट काम ।
दादू शिष्य डूबन लगा, दादू कहा भजराम ॥२६॥ 
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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