बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

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*दादू सेवक सांई वश किया, सौंप्या सब परिवार ।*
*तब साहिब सेवा करै, सेवक के दरबार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *सेवा*
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भगवान के मन्दिर और नगर के मार्ग के मध्य एक खड्डा पड़ गया था । उससे मन्दिर को आने वाले भक्तों को विक्षेप होता देखकर अनन्ताचार्य टोकरी और फावड़ा लेकर उसके भरने के काम में लगे तथा अपनी गर्भवती स्त्री को भी लगा लिया । प्रसवकाल समीप आ जाने से स्त्री को काम करने में क्लेश होता देखकर, भगवान पनिहारे के रूप में उसके पास गये और बोले - लाओ तुम्हारे बदले मे मैं टोकरी ढोता हूँ, तुम विश्राम करो । 
थोड़ी देर में अनन्ताचार्य ने देखा कि - स्त्री के बदले कोई पनिहारा टोकरी ढोता है । सोटा लेकर दौड़ते हुवे बोले - तू कौन है ? जो हमारी सेवा मे साँझी हो रहा है । भगवान् भाग मन्दिर में जा घुसे । अनन्ताचार्य भी साथ ही गये और भगवान की मूर्ति को धूल से भरी देखकर समझ गये और बोले - भगवन् ! आपने स्त्री पर दया की, किन्तु सेवाकार्य तो सेवक को शोभा देता है न कि स्वामी को । इससे सूचित होता है कि संत निज तन से सेवा करने में ताप(दु:ख) नहीं मानते ।
निज तन से सेवा करे, सन्त न मानत ताप ।
साझी को डाटा तुरंत, अनन्ताचार्य आप ॥३२४॥ 
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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