सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

= १४३ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷

🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू करणी ऊपर जाति है, दूजा सोच निवार ।*
*मैली मध्यम ह्वै गये, उज्ज्वल ऊँच विचार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ सारग्राही का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *सेवा*
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पांडवो के अश्वमेध यज्ञ के समय यज्ञ-पूर्ति पर शंख नहीं बजा तब संत वाल्मीकि श्र्वपच को रसोई में बैठाकर द्रौपदी ने अपने हाथों से भोजन करवाया । इससे सूचित होता है कि सन्त -सेवा में जाति नहीं देखी जाती, साधुताही देखी जाती है ।
अरिल ----
ईश्वर के सुप्रतीक सन्त आकार है,
निराकार लखने का कहें प्रकार हैं ।
भवसागर से करें प्रगट उद्धार है,
कर सन्तन की सेवा अधिक हितकार है ॥
साधु सेव में सुजन जन, जाति लखत हैं नांहि ।
वाल्मीकि को जिमाया, बिठा रसोई मांहि ॥३५७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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