🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*तन नहिं तेरा धन नहिं तेरा,**कहा रह्यो इहि लाग ।*
*दादू हरि बिन क्यों सुख सोवे,*
*काहे न देखे जाग ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद. १३४)*
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साभार ~ Mahant Ram Gopal Das Tapasvi
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##### *जागो राजा बाबू* #####
एक व्यक्ति व्यवसाय करते थे । उसकी उम्र लगभग साठ साल हो गई थी । वे सत्संग में जाते थे । विचार करते थे कि मैं भी सब कुछ छोड़ कर प्रभु का भजन करूंगा । रोज सत्संग में जाते तो भजन करने का मन बनाते; मगर दुकान में जाकर बैठते ही भूल जाते । उनका नाम - राजा बाबू था । हमेशा की तरह एक दिन वे सज्जन सूर्योदय से पहले घूमने निकले थे । घूमते घूमते काफी दूर निकल गये थे ।
वहां मार्ग के किनारे एक घर में एक महिला अपने बेटे को जगा रही थी - "राजा बाबू ! उठो, कब तक सोये रहोगे, सुबह हो गई है । अरे उठो बाबू ।" राजा बाबू छड़ी लिए जा रहे थे, उस माँ की बात सुनी कि कब तक सोए रहोगे, उठो, बहुत देर हो गई है । जग गये । वहीं से वापस लौट गए । घर आकर कहा - "आज असली उपदेश मिल गया । अब जग गया । और सब खत्म हो गया, आज से ही प्रभु की भक्ति शुरु ।"
^^^संस्कार बिन्दु साम्भर के सौज्यन्य से^^^
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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