🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*काया कठिन कमान है, खांचै विरला कोइ ।*
*मारै पंचों मृगला, दादू शूरा सोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *क्रोध*
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बंगाल के प्रसिद्ध विश्वनाथ शास्त्री से कुछ पंडितों का किसी विषय पर शासत्रार्थ हो रहा था । प्रतिपक्ष हारने लगे तब उनमें से एक पंडित ने नाक छिनक कर विश्वनाथ के मुख पर डाल दिया । उसने तुरंत मुख साफ करके हंसते हुऐ कहा - "यह तो क्षण भर के लिये बिना प्रसंग की बात हो गयी । अब अपने मुख विषय पर चलिये ।" विश्वनाथजी की यह सहनशीलता देखकर प्रतिपक्ष ने हार मान ली ।
सहनशील नर के हृदय, आता नहिं है क्रोध ।
नाक छीनक ने पर नहीं, विश्वनाथ को क्रोध॥१६६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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