🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*समर्थ का शरणा तजै, गहै आन की औट ।**दादू बलवंत काल की, क्यों कर बंचै चोट ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ काल का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *भाग१* *कृपणता*
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एक कृपण एक विपत्ति में पड़ा । उस से छूटने के लिये अपने गांव के एक संत के सौ रुपये चढाने की मन्नत की । दु:ख से छूट गया ।
फिर सोचा - संत सौ रुपये का क्या करेंगे । उन्हे तो २५ ही बहुत होंगे।
फिर बदला - नहीं, संत को एक चद्दर चढा देंगे ।
फिर बदला - संत चद्दर का क्या करेंगे एक नारियल भेंट कर देंना बहुत होगा ।
नारियल लाने चला तो दुकानदार ने दो आने माँगे । वह बोला - "बहुत अधिक है ।"
दुकानदार - "यदि सस्ता लेना हो तो बाग मे चले जाओ ।"
वह बाग में पहुँचा, माली ने चार पैसे माँगे । किन्तु उसने कहा - "छोटा सा दे दो।
माली - "दो पैसे लगेंगे ।"
उसने कहा - "एक दूंगा ।" माली - "वह कूप पर लटका रहा है उसे तोड़ लो एक ही देना ।"
इसने उसे पकड़ कर खींचा झटका लगने से इसके पैर उखड़ गये नारियल के सहित कूप मे गिर पड़ा और मर गया ।
पैसे को लखता कृपण, मृत्यु लखत है नांहि ।
इक पैसे के कारणे, पड़ा कूप के मांहि ॥६२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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