🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू जिन पहुँचाया प्राण को, उदर उर्ध्व मुख खीर ।*
*जठर अग्नि में राखिया, कोमल काया शरीर ॥*
*दादू समर्थ संगी संग रहै, विकट घाट घट भीर ।*
*सो सांई सूं गहगही, जनि भूलै मन बीर ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *ईश्वर*
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एक समय भगवान् श्री कृष्ण से रुकमणीजी ने प्रश्न किया - आपका नाम विश्वम्भर है, क्या आप सबका भरण-पोषण करते हैं ? श्री कृष्ण - हाँ, मैं सबको भोजन देता हूं । कुछ दिन बाद रुकमणीजी ने एक चींटी को एक डिबिया में बन्द करके श्री कृष्ण से पूछा आज आपने सबको भोजन दिया है । श्रीकृष्ण - हां, सबको दिया है और तुम जिसके लिये पूछना चाहती हो, उसे भी दिया है ।
रुकमणी ने चकित हो कर डिबिया खोली तो देखा कि चींटी एक चावल के दाने को पकड़े बैठी है । डिबिया बन्द करते समय भगवत् कृपा से रुक्मणी के तिलक का चावल डिबिया में जा पड़ा था । सर्वज्ञ भगवान् से तो कोई भी बात छिपी रह नहीं सकती है ।
विश्वभर परमात्मा, सबको भोजन देत ।
रूक्मणी का, संशय हरा सचेत ॥८०॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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