🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*एक मुहूर्त मन रहै, नांव निरंजन पास ।*
*दादू तब ही देखतां, सकल कर्म का नास ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *दृढ़ता*
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एक गडरिया भेड़ें चरा रहा था, मार्ग से एक संत जा रहे थे । उन्हें देख, आगे बढ़कर उसने सन्त को प्रणाम किया । संत - 'कुछ भजन भी करता है ? गडरिया- 'मैं तो भजन में समझता नहीं करूंगा क्या ? संत - 'सुबह सांझ 'श्रीराम' इस मंत्र को २१-२१ माला प्रतिदिन फेर लिया कर । गडरिया - 'इतना मुझ से न होगा ।' काम करते करते उसने हाथ पैर धोकर पांच नाम प्रतिदिन सुबह सांझ लेने का दृढ़ नियम कर लिया ।
एक पहर रात शेष रहते तथा एक पहर दिन शेष रहते ही पांच नाम की चिन्ता उसके मन में होने लग जाती थी । उसने अपने नियम का अन्त तक निर्वाह किया । जब परलोक में उसके कर्मों का लेखा किया गया, तो दो -पहर को भजन उसे जीवन में मिला, उससे उसका उद्धार हो गया । इसलिये प्रत्येक को चाहिये कि अपने कल्याण के लिये कुछ दृढ़ नियम बना ले ।
किंचित भी हरिभजन की, दृढ़ता से उद्धार ।
पांच नाम ले गडरिया, भया जगत से पार ॥५०॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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