🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*राखणहारा एक तूँ, मारणहार अनेक ।*
*दादू के दूजा नहीं, तूँ आपै ही देख ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विनती का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *परोपकार*
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तेरहवी शताब्दी में महाराष्ट् में बर्षा नहीं होने से १२ वर्ष तक अकाल पड़ा । गोलकुण्ड वेदरशाही राज्य के अन्तगर्त मड़गबेड्या नामक प्रांत का शासन दामाजी के हाथ में था । वहां के राज्य का अन्न भण्डार उसने भूखों को बांट दिया, इससे उनके सहायक सुबेदार ने बादशाह को शिकायत की । वेदर नृप ने अपने प्रधान सेनापति को एक हजार सेना के साथ जाकर दामाजी को पकड़ लाने की आज्ञा दी ।
गोलकुण्डे के मार्ग में पण्डरपुर पड़ता है, वहां दामाजी भगवान् के दर्शन तथा प्रार्थना करके फिर आगे चले । उधर वेदर का बादशाह दोपहर के समय दामाजी की बाट देख रहा था । भगवान ने बिठ्ठू मदार(चमार) का रूप बना, गल्ले के दाम चुका, बादशाह से रसीद लेकर, दामा जी की गीता में रख दी । जब वे पाठ करने लगे, तब वह मिल गई ।
बादशाह मदार के रूप से मोहित हो, पागल- सा हो गया था । दामाजी से मिलते ही उन्हें मुक्त करके कहा - 'तुम्हारे उस बिठ्ठू को बुलाओ ।' पर अब वह कहां मिलता ? इससे सूचित होता है कि परोपकारियों पर यदि दु:ख आ जाय तो ईश्वर उसे शीध्र ही हर लेते हैं ।
पर उपकारी जनों का, क्लेश हरत भगवन्त ।
वेदर शासक दण्ड से, बचा सुदामा पन्त ॥१५॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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