शुक्रवार, 6 मार्च 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू पूरणहारा पूरसी, जो चित रहसी ठाम ।*
*अन्तर तैं हरि उमग सी, सकल निरंतर राम ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *दृढ़ता*
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एक व्यक्तिने किसी कारण से यह प्रतिज्ञा की कि - मृग सींग पर बँधा हुआ अन्न मेरे पास आयेगा तो खाऊँगा नहीं तो नहीं । पहाड़ पर जा बैठा, भूखे मरते तीन दिन निकल गये, चौथे दिन मध्याहान के समय उसके पास एक मृग आया उसके सींग मे रोटियां बाँधी थी, खोलकर खालीं । दूसरे दिन मृग ने देर की वह व्यक्ति खड़ा होकर देखने लगा । 
करीब -करीब २ बजे रोटी लेकर मृग आया, खोलकर खालीं, तीसरे दिन मृग ने और भी देरी करी, तब वह व्यक्ति वृक्ष पर चढ़कर देखने लगा, करीब ४ बजे मृग आया और बोला - 'अब तुम वृक्षों पर चढ़ने लगे हो, इसलिये रोटी खाने ग्राम में चले जाया करो, कल से मैं नहीं लाऊँगा ।' देखो दृढ़ता रही तब तक तो रोटी लाता रहा और दृढ़ता में कमी आते ही मृग ने जबाब दे दिया । इसलिये मनुष्य को अपने कार्य में दृढ़ रहना चाहिये ।
दृढ़ता से संकल्प सिध, होत तजे नहिं कोय ।
आत अन्न मृग सींग पर, तजत न आया कोय ॥४७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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