🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*साधु निर्मल मल नहीं, राम रमै सम भाइ ।*
*दादू अवगुण काढ कर, जीव रसातल जाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ निन्दा का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *गुण-ग्राहकता*
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एक संत मार्ग में जा रहे थे, किसी व्यक्ति ने पर कटाक्ष करते हुए कहा - 'देखो यह ऊँट के समान मस्त होकर चला जा रहा है ।' संत ने रुक कर कहा - भाई ! तुमने ठीक कहा है -
'साधु बड़े परमारथी, बने धर्म के ऊँट ।
सात पांच को लादकर, ले जा धरे बैकुण्ठ ॥'
यह सुनकर सब चुप रहे । एक और संत भी मार्ग में चले जा रहे थे, किसी ने कहा - 'देखो यह मोडा कैसे चला जा रहा है' संत ने खड़े होकर कहा - 'तुमने हमारा नाम यथार्थ धरा है कारण हमने मोह के डाह(लगाम) लगाई है ।' कहने वाला लज्जित हो आगे निकल गया ।
कटुवचन से भी गुणहि लें, सभझे संत सुजान ।
ऊंटक मोडा वचन सुन, कीन्हा अर्थ महान ॥३५॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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