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🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सेवक बिसरै आप कौं, सेवा बिसरि न जाइ ।*
*दादू पूछै राम कौं, सो तत्त कहि समझाइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *वात्सल्य भक्ति*
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गुजरात में एक बाई वात्सल्य भाव से भगवत् मूर्ति की आराधना करती थी । उसके गांव में भेड़ियों का उपद्रव बढ रहा था । कई लड़कों को भेड़िये उठा ले गये थे । यह देखकर अपने भगवत् मूर्ति रूप बालक की रक्षा करने के लिये हाथ में मूसल लेकर रात भर पहरा देने लगी ।
दिन में भगवत् सेवा में और रात में पहरा देने में लगी रहे, ऐसा करते बहुत दिन बीत गये तब भगवान को दया आई । वे मनोहर बालक के रूप में उसके पास प्रगट हुये । उसके घुँघरू और आभूषणों की ध्वनि सुन के हाथ में मूसल लेकर वह दौडी और आगे एक मनोहर बालक देखकर उसे पुछा - "तू कौन है ? "बालक - मैं ईश्वर हूँ ।" जो तेरी इच्छा हो वही माँग । बाई - "यदि तू ईश्वर है तो यह वर दे कि - "मेरे इस लड़के को भेड़िये नहीं ले जाय ।" इससे सूचित होता है कि वात्सल्य भक्त रात दिन भगवत रुप अपने पुत्र का ही भला चाहते हैं ।
वात्सल्य जन वत्स का, भला चहैं दिन रात ।
इक बाई ने ईश से, मांगी यह ही बात ॥२५७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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