🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*सब घट एकै आत्मा, जानै सो नीका ।*
*आपा पर में चीन्ह ले, दर्शन है पीव का ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *महाप्रसाद*
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ओड़छा ले जाने के लिये लोग व्यासदास जी के पीछे पड़े थे । गोविन्द देव जी मंदिर से भंगिनि(नीच जाति की औरत, स्वीपर) आ रही थी । व्यासदास जी ने पूछा - 'तेरे पास क्या है ?' भंगिनि - 'भगवान और भक्तों का प्रसाद' । व्यासदासजी दौड़े और उसकी टोकरी से एक पकोडी उठाकर खा गये । इससे ओड़छे नरेश आदि ने उन्हें भ्रष्ट जान कर ओड़छे ले जाने का विचार छोड़ दिया । इससे सूचित होता है कि महान संत अन्त्यज के हाथ के महाप्रसाद से भी धृणा नहीं करते ।
करे धृणा न प्रसाद से, जो हो सन्त महान ।
भंगिनि से ली पकौडी, व्यासदास मतिमान ॥१६२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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