सोमवार, 20 अप्रैल 2020

= ५२ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*रात दिवस का रोवणां, पहर पलक का नांहि ।*
*रोवत रोवत मिल गया, दादू साहिब माँहि ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विरह का अंग)*
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भक्त*
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महाराणा ने मीराजी को बुलवाने के लिये कुछ ब्रह्मण द्वारिका को भेजे थे । ब्राह्मणों ने मीरांबाई को लाने का जब अति आग्रह किया तब वे भगवान् की आज्ञा लेने गई और बोली - "भगवन् ! आपसे मिलकर बिछुड़ना तो मुझे अच्छा नहीं लगता आपकी आज्ञा क्या आज्ञा है ।" इस पर भगवान् ने उन्हें अपने में ही मिला लिया था । यह प्रसिद्ध है । इससे सूचित होता है कि भक्त भगवान् में ही मिलते है ।
भक्त मिलत भगवान् में, इससे संशय नाँहिं ।
मीरां तन देखत मिला, भगवत् मूरती माँहि ॥३५४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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