🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*अजर जरै रस ना झरै, पीवत थाकै नांहि ।*
*दादू सेवक सो भला, भर राखै घट मांहि ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ जरणा का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *अर्चना भक्ति*
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महाराजा अम्बरीषजी की छोटी रानी उनसे छिप कर उनकी भगवत् सेवा के कार्य जल भरना, बर्तन साफ करना, झाडू निकालना आदि कर जाती थी, एक दिन राजा ने छिप कर पता लगा लिया और तत्काल कह दिया कि - 'तुम्हे सेवा पूजा करनी हो तो अलग मन्दिर बना कर करो, मैं मेरी पूजा में साझा नहीं होने दूंगा ।" इससे सूचित होता है कि श्रेष्ठ पूजक अपनी सेवा पूजा में दूसरों साझा नहीं करते ।
साझा करत न अन्य का, अर्चक अर्चा माँहि ।
अम्बरीष ने रानी को, रोका, करना नाँहिं ॥१४८॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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