🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*अजर जरै रस ना झरै, घट मांहि समावै ।*
*दादू सेवक सो भला, जे कहि न जनावै ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ जरणा का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *स्मरण भक्ति*
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सिवली नामक सन्त गुप्त, सिव रूप से भजन करते थे, इस कारण उनके जीवन में उनके भजन साधना में कभी भी बाह्य विघ्न नहीं हुआ था, इससे सूचित होता है कि गुप्त रूप से भजन करना अति श्रेष्ठ है ।
गुप्त भजन से लाभ अति, विघ्न भीति रह नाँहिं ।
विघ्न कछू भी नहिं, हुआ सिवली जीवन माँहिं ॥९६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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