गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

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*दादू जल दल राम का, हम लेवैं परसाद ।*
*संसार का समझैं नहीं, अविगत भाव अगाध ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्‍वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *महाप्रसाद*
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राणा का भेजा हुआ विष का प्याला ले जाकर दयाराम पंडे ने कहा - लो भगवान का चरणामृत प्रसाद । प्रसाद का नाम सुनते ही मीराजी उसे परम सुखदाता जान कर सह हर्ष पी गई और वह उन्हें अमृत से भी अधिक सुखदाता हुआ । इससे सूचित होता है कि प्रसाद के नाम से खाया हुआ विष भी मारक नहीं होकर तारक ही होता है ।
प्रभु प्रसाद के नाम से, विष अमृत हो जाय ।
पी गई मीरा प्रेम से, मान अधिक सुखदाय ॥१६५॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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