शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

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*दादू पलक मांहि प्रकटै सही, जे जन करैं पुकार ।*
*दीन दुखी तब देखकर, अति आतुर तिहिं बार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी​ 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *अर्चना भक्ति*
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लूसा को तम्बाकू पीने का बड़ा व्यसन था । उसने तम्बाकू छोड़ने के लिये बहुत यत्न भी किया किन्तु सफल नहीं हो सकी । चालीस वर्ष की अवस्था में पहुँचने पर तो उसे तम्बाकू को छोड़कर और कोई भी वस्तु अच्छी नहीं लगती थी । अन्त में तम्बाकू से छुटकारा पाने के लिये उसने निरन्तर भगवान से प्रार्थना करना आरंभ कर दिया । 
कुछ समय के बाद वह अग्नि से तप रही थी कि आवाज सुनाई दी - 'तम्बाकू पीना बन्द करो' बस, उसी क्षण से उसे तम्बाकू से इतनी धृणा हो गई कि तम्बाकू की गंध से भी घबराने लगती थी । इससे सूचित होता है कि प्रार्थना से दुर्व्यसन भी छूट जाते हैं ।
करे प्रार्थना छूटत, दुष्ट व्यसन सत जान ।
तम्बाकू छुटी सहज, लूसा की दुख दान ॥१५७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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