शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

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*दादू राम नाम निज औषधि, काटै कोटि विकार ।*
*विषम व्याधि थैं ऊबरै, काया कंचन सार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी​ 
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *स्मरण भक्ति*
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ब्यावर(राजस्थान) की जानकी नाम की एक ब्राह्मणी बाई थी जो वृद्धावस्था में कभी कभी बदरीजी टकशाली की धर्मशाला पुष्कर में रहा करती थी । उसके एक गद(रोग) का दौरा आता था । जिससे उसके शरीर में व्याकुलता बढ जाती और रोना ही रोना आता था । उसका राम नाम में पूर्ण विश्वास था । रोग के दौरा के समय उसके पास ही जो भी होता उसे अपनी माला देकर कहती थी - 'राम नाम की माला फेरते हुये मेरे झाड़ा दे दो ।' माला फेरकर उसके झाड़ा लगाने पर तत्काल ही दौरा मिट जाता था और वह अच्छी हो जाती थी । मैंने भी कई बार उसके राम नाम की माला का झाड़ा लगाया था और उसका फल भी प्रत्यक्ष देखा था । इससे सूचित होता है कि ईश्वर नाम से रोग का वेग भी शांत हो जाता है ।
शांत करत गद वेद को, नाम सहित विश्वास ।
लखा जानकी की तुरत, मिट जाती थी त्रास ॥७९॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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