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*नारद गावें गुण गोविन्द,*
*करैं शारदा सब ही छंद ।*
*नटवर नाचै कला अनेक,*
*आपन देखै चरित अलेख ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद्यांश. ३९१)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *लीलानुकरण भक्ति*
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रास लीला हो रही थी, एक कुबड़ी बाई दौड़ती हुई आई और श्री कृष्ण् स्वरूप के चरणों में पड़ कर बोली - 'भगवन् ! मैंने सुना है कि आपने कुबजा की कूब निकाली थी । यदि यह सत्य है तो कृपा करके मेरी भी कूब निकाल दीजिये । यह सुनते ही कृष्णस्वरूप ने अपनी लात लगा कर तुरंत ही उसकी कूब निकाल दी । वह सर्वथा ठीक हो गई । इससे सूचित होता है कि कभी कभी लीला में भी तत्त्काल लाभ मिल जाता है ।
लीला से भी कभी कभी, लाभ होत तत्काल ।
इक कूबड़ी की कृष्ण ने, दीन्ही कूब निकाल ॥२०८॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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