रविवार, 24 मई 2020

(२४)

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू बल तुम्हारे बापजी, गिनत न राणा राव ।*
*मीर मलिक प्रधान पति, तुम बिन सब ही बाव ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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*राघवयादवीयम्* ~ लेखक *श्री वेंकटाध्वरी*
साभार सौजन्य ~ मुदित मिश्र विपश्यी(हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद)
अंग्रेजी अनुवाद ~ डा. सरोजा रामानुजम, M.A., Ph.d, Siromani in Sanskrit
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(२४)
*श्री रामलीला*(अनुलोम) 
भानुभानुतभावामासदामोदपरोहतं ।
तंहतामरसाभक्षोतिराताकृतवासविम् ॥२४॥ 
सूर्य से भी तेज में प्रशंसित, रमणीक पत्नी(सीता) को निरंतर अतुल आनन्द प्रदाता, जिनके नयन कमल जैसे उज्जवल हैं – उन्होंने इंद्र के पुत्र बलि जका संहार किया ॥२४॥
Rama, who had more lustre than the Sun, who was the joy giver to Seetha forever, who had eyes like lotus and who is the giver of all, killed Vali, son of Indra.(24) 
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(२४) 
*श्री कृष्णलीला*(विलोम) 
विंसवातकृतारातिक्षोभासारमताहतं । 
तं हरोपदमोदासमावाभातनुभानुभाः ॥२४॥ 
उस कृष्ण ने – जिनके तेज के समान सूर्य भी गौण है – जिसने अपने उत्तेजित सेवक गरुड़ की रक्षा की, जिस गरुड़ ने अपने डैनों की फड़फड़ाहट मात्र से शत्रुओं की शक्ति और गर्व को क्षीण किया था – जिस(कृष्ण) ने कभी शिव को भी पराजित किया था ॥२४॥
Krishna, who vanquished even Siva, and whose lustre belittled even that of the Sun, protected his servant Garuda who agitated and weakened the strength and pride of the enemies by merely the breeze of the fluttering wings.(24)
(क्रमशः)

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