रविवार, 24 मई 2020

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*तन मन लै लागा रहै, राता सिरजनहार ।*
*दादू कुछ मांगैं नहीं, ते बिरला संसार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ निष्काम पतिव्रता का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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किसी गांव में निर्लोभी भक्त तुलाधार शूद्र रहते थे । वे बड़े दरिद्री थे । नित्य नदी पर स्नान करने जाते थे । उनके पास केवल एक धोती और एक ही गमछा(बदन को ढ़कने का कपड़ा) था और वे दोनों ही फटे हुये थे । भगवान ने दो बढ़िया वस्त्र नदी तट पर रखे किन्तु तुलाधार ने किसी अन्य के जान कर नहीं लिये । दूसरे दिन मूल, फलों जैसी सोने की डली रखी वह भी नहीं ली तब देवताओं ने धन्यवाद देते हुये तुलाधार पर पुष्प बरसाये ।
फिर भगवान ज्योतिषी बनकर उसके गांव में रेखा देखने लगे । तुलाधार की स्त्री ने भी रेखा दिखाई । ज्योतिषी ने कहा - 'तेरे पति को आज भी धन मिला था, वह छोड़ आया ।' उसने जाकर पति से कहा, वह पत्नी के साथ ज्योतिषी के पास आया । ज्योतिषी ने कहा - 'तू निर्दोष धन को भी छोड़ कर आया तब तेरा भाग्य कैसे खुलेगा ।' तुलाधार - 'मुझे धन की इच्छा नहीं है, धन तो उलटा गिराता है ।' यह सुनते ही देवता लोग तुलाधार का जयघोष करने लगे और भगवान ने भी दर्शन दिये उसे ।
निर्लोभी जन को हरी, देवें दर्शन जाय ।
तुलाधारजी शूद्र हित, प्रगट भये प्रभु आय ॥४१३॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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