शुक्रवार, 29 मई 2020

*नाममाहात्म्य अथवा अनुराग*

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*जेता पाप सब जग करै, तैता नाम बिसारे होइ ।* 
*दादू राम संभालिये, तो येता डारे धोइ ॥* 
*(श्री दादूवाणी ~ स्मरण का अंग)* 
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*साभार ~ श्रीरामकृष्ण-वचनामृत{श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)}* 
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ 
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(५) 
*श्रीरामकृष्ण और सर्वधर्मसमन्वय* 
भोजन के उपरान्त श्रीरामकृष्ण छोटे तखत पर आराम कर रहे हैं । कमरे में लोगों की भीड़ बढ़ रही है । बाहर के बरामदे भी लोगों से भरे हैं । कमरे के भीतर जमीन पर भक्त बैठे हैं और श्रीरामकृष्ण की ओर एकदृष्टि से ताक रहे हैं । केदार, सुरेश, राम, मनोमोहन, गिरीन्द्र, राखाल, भवनाथ, मास्टर आदि बहुत लोग वहाँ पर मौजूद हैं । राखाल के पिता आए हैं, वे भी वहीँ बैठे हैं । 
एक वैष्णव गोसाई भी उसी स्थान पर बैठे हैं । श्रीरामकृष्ण उनसे बातें कर रहे हैं । गोसाइयों को देखते ही श्रीरामकृष्ण सिर झुकाकर प्रणाम करते थे- कभी कभी तो उनके सामने साष्टांग प्रणाम करते थे । 
*नाममाहात्म्य अथवा अनुराग* 
श्रीरामकृष्ण- अच्छा, तुम क्या कहते हो? उपाय क्या है ? 
गोसाई- जी, नाम से ही सब कुछ होगा । कलियुग में नाम की बड़ी महिमा है । 
श्रीरामकृष्ण- हाँ, नाम की बड़ी महिमा तो है, पर बिना अनुराग के क्या हो सकता है? ईश्वर के लिए प्राण व्याकुल होने चाहिए । सिर्फ नाम लेता जा रहा हूँ, पर चित्त कामिनी और कांचन में है इससे क्या होगा ? 
“बिच्छू या मकड़ी के काटने पर खाली मन्त्र से वह अच्छा नहीं होता-उसके लिए कण्डे का ताप भी देना पड़ता है ।” 
गोसाई- तो अजामिल का क्यों हुआ ? वह महापातकी था, ऐसा पाप ही न था जो उसने न किया हो; पर मरते समय अपने लड़के को ‘नारायण’ कहकर बुलाने से ही उसका उद्धार हो गया । 
श्रीरामकृष्ण- शायद अजामिल पूर्वजन्म में बहुत कर्म कर चुका था । और यह भी लिखा है कि उसने बाद में तपस्या भी की थी । 
“अथवा यों कहो कि उस समय अन्तिम क्षण आ गए थे । हाथी को नहला देने से क्या होगा, फिर धूल-मिट्टी लिपटाकर वह ज्यों का त्यों हो जाता है । पर हाथीखाने में घुसने के पहले ही अगर कोई उसकी धूल झाड़ दे और उसे नहला दे तो फिर उसका शरीर साफ रह सकता है । 
“मान लिया कि नाम से जीव एक बार शुद्ध हुआ, पर वह फिर तरह तरह के पापों में लिप्त हो जाता है । मन में बल नहीं; वह प्रण नहीं करता कि फिर पाप नहीं करूँगा । गंगास्नान से सब पाप मिट जाते हैं सही, पर सब लोग कहते हैं कि वे पाप एक पेड़ पर चढ़े रहते हैं । जब वह मनुष्य गंगाजी से नहाकर लौटता है, तो वे पुराने पाप पेड़ से कूदकर फिर उसके सिर पर सवार हो जाते हैं । (सब हँसे) उन पुराने पापों ने उसे फिर घेर लिया । दो-चार कदम चलते ही उसे धर दबोचा । 
“इसलिए नाम भी करो और साथ ही प्रार्थना भी करो कि ईश्वर पर अनुराग हो, और जो चीजें दो दिन के लिए है-जैसे धन, मान, देहसुख आदि-उनसे आसक्ति घट जाय । 
(क्रमशः)

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