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*इक टग ध्यान रहैं ल्यौ लागे,*
*छाकि परे हरि रस पीवैं ।*
*दादू मगन रहैं रस माते,*
*ऐसे हरि के जन जीवैं ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद्यांश. २७२)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भक्त*
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रामजी के राज तिलक के समय बहुत सा समाज जुड़ा था । इससे माता कौसल्या को चिन्ता हुई कि - "कहीं राम के नजर न लग जाय ।" जब राज तिलक के समय आरती करने आई तब राम को नजर से बचाने के लिये सर्व प्रथम उनके मुख पर एक स्याही की बिन्दी लगाई, फिर आरती की । इससे सूचित होता है कि वात्सल्य भक्तों को भगवान के नजर लगने का भी भय होता है ।
नजर न लग जाय कहीं, वात्सल्य रह भीत ।
कौसल्या ने स्याहि की, बिन्दी दी सहप्रीत ॥२४१॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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