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*राम जपै रुचि साधु को, साधु जपै रुचि राम ।*
*दादू दोनों एक टग, यहु आरम्भ यहु काम ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *भक्त*
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भक्त हिम्मतदासजी अपने बरायछ गांव से पांच कोस दूर पन्ना के युगल किशोर भगवान के दर्शन करने नित्य प्रति नियम से जाते थे । एक दिन किसी कारण से देर हो गई । पंडे ने कहा - 'पट बंद हो गये, अब दर्शन नहीं हो सकते ।' यह सुन कर हिम्मतदास बोले -
'कपटिन के लागे रहै, हिम्मतदास कपाट ।
प्रेमिन के पग धरत ही, खुलत कपाट झपाट ।।'
हिम्मतदास मंदिर के द्वार पर पहुंचे कि भगवान के पट सहसा खुल गये । इससे सूचित होता है कि भक्तों के लिये भगवान के पट बन्द नहीं होते ।
भक्तन हित हरि दर्श के, होत न बन्ध कपाट ।
हिम्मतदास हिं दर्श हित, खुले कपाट झपाट ॥३५२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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