गुरुवार, 21 मई 2020

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*श्री दादू अनुभव वाणी, द्वितीय भाग : शब्द* 
*राग टोडी(तोडी) १६ (गायन समय दिन ६ से १२)* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
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२८० - त्रिताल
हुसियार हाकिम न्याव है, 
सांई के दीवान ।
कुल का हिसाब होगा, 
समझ मुसलमान ॥टेक॥
नीयत२ नेकी सालिकाँ४, 
रास्ता ईमान५ ।
इखलास६ अँदर आपणे, 
रखणां सुबहान७ ॥१॥
हुक्म हाजिर होइ बाबा, 
मुसल्लम८ महरबान९ ।
अक्ल१० सेती आपणा, 
शोध लेहु सुजान ॥२॥
हक११ सौं हजूरी हूंणाँ, 
देखणाँ कर ज्ञान ।
दोस्त१२ दाना१३ दीन का, 
मनणाँ फरमान१४ ॥३॥
गुस्सा हैवानी१५ दूर कर, 
छाड़ दे अभिमान ।
दूई१६ दरोगा१७ नाँहिं खुशियां, 
दादू लेहु पिछान ॥४॥
अरे हाकिम ! सावधान रहना, भगवान् के दरबार में न्याय है । हे मुसलमान ! समझ लेना वहां सबका१ हिसाब होगा । 
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अपनी इच्छा२ भलाई३ में रखना, सदा४ ईमानदारी५ के मार्ग पर चलना । अपने भीतर सबसे प्रेम६ रखना और पवित्र७ प्रभु की आज्ञा में उपस्थित रहते हुये 
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पूरा८ दयालु९ होना । हे बुद्धिमान् ! बुद्धि१० से अपने भीतर ही परमात्मा को खोजले और 
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भजन द्वारा सत्य११ स्वरूप प्रभु के समीप होकर ज्ञान से उसे देखने का यत्न करना । दीनों के मित्र१२ और ज्ञाता१३ परमात्मा तथा सँतों की आज्ञा१४ मानना । 
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क्रोध और पाशविक१५ वृत्ति हृदय से दूर करना, अभिमान को छोड़ देना । मिथ्या१७ भेद१६ जन्य प्रसन्नता में निमग्न मत होना । यही तुम्हारा कर्त्तव्य है, इसे पहचान कर पालन करना । 
इस पद से सांभर के हाकिम बिलँदखान को उपदेश दिया था और वह इस उपदेश को मानकर महाराज का भक्त ही बन गया था ।
(क्रमशः)

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