मंगलवार, 26 मई 2020

साच का अंग २६/२९

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श्रीदादूवाणी भावार्थदीपिका भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य ।
साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*हस्तलिखित वाणीजी* चित्र सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
(श्री दादूवाणी ~ १३. साच का अंग)
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*॥ अदया-हिंसा ॥*
*दादू जाको मारन जाइये, सोई फिर मारै ।*
*जाको तारन जाइये, सोई फिर तारै ॥२६॥*
इस जन्म में जो जिसको मारता है वह अगले जन्म में पैदा होकर उसको मारता है । जो जिसकी रक्षा करता है तो आगे जन्म लेकर वह उसकी रक्षा करता है, ऐसा समझकर किसी की हत्या मत करो । अन्यथा उसका फल अगले जन्म में अवश्य भोगना पड़ेगा । क्योंकि करोड़ों कल्प क्यों नहीं व्यतीत हो जाय परन्तु विना भोगे कर्म नष्ट नहीं होते ।
जैसे हजारों गायों में उसका बछड़ा अपनी मा को पहचान लेता है वैसे ही पहले किया हुआ कर्म कर्ता के पीछे पीछे चलता है । शयन करने पर वह कर्म भी शयन करता है, चलने पर वह भी चलने लगता है, और बैठने पर वह भी बैठ जाता है । जैसे छाया और धूप परस्पर में संबद्ध है ऐसे ही कर्म और कर्ता मिले जुले हैं ।
जो मनुष्य सब भूतों को अपने समान समझता है किसी पर प्रहर नहीं करता । दण्ड को सदा के लिये त्याग देता है । क्रोध को अपने वश में रखता है, वह मृत्यु के पश्चात् सुख भोगता है ।
जो संपूर्ण भूतों का आत्मा है तथा जो सब भूतों को समान देखता है । उस गमनागमन से रहित ज्ञानी की गति का पता लगाने में देवता भी मोह में पड़ जाते हैं ।
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*दादू नफ्स नाम सौं मारिये, गोशमाल दे पंद ।*
*दूई है सो दूरि कर, तब घर में आनन्द ॥२७॥*
दोनों हाथों से कानों को मरोड कर मन को समझाओ कि रे मन ! तू व्यर्थ में ही इधर उधर क्यों दौड़ता है तथा नामचिन्तन करके अपने मन को वासना रहित बनाकर अपने हृदय से द्वैत भाव को दूर करो, तब आप अपनी आत्मा को देख सकोगे ।
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*॥ साच मुसलमान के लक्षण ॥*
*मुसलमान जो राखे मान, सांई का माने फरमान ।*
*सारों को सुखदाई होइ, मुसलमान कर जानूँ सोइ ॥२८॥*
*दादू मुसलमान महर गह रहै, सबको सुख, किसही नहिं दहै ।*
*मुवा न खाइ, जीवत नहिं मारै, करै बंदगी, राह संवारै ॥२९॥*
मुसलमान शब्द का वास्तविक अर्थ बतला रहे हैं, श्री दादूजी महाराज । प्रभु के प्रति विश्वास तथा उसकी आज्ञा का पालन करता हो । सबका सन्मान एवं किसी को भी दुःखी न करे । प्राणिमात्र के प्रति दया तथा सब को सुखी करे । कटु वचनों से किसी की आत्मा को न दुखावे । मांस न खावे, जीवों की हत्या न करे । विवेक संतोष सत्य को हृदय में धारण करे । सन्मार्ग में चले ।
(क्रमशः)

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