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*दादू तन मन लाइ कर, सेवा दृढ़ कर लेइ ।*
*ऐसा समर्थ राम है, जे मांगै सो देइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ समर्थता का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *पति भक्ति*
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वामदेव नाम के एक छीपी भगवत भक्त थे । उनकी पुत्री बाल विधवा हो गई थी । वामदेव ने उसे भगवत पूजा देकर के कहा - "तेरा प्रेम होगा तो जो भी तेरी इच्छा होगी सो ही भगवान तेरी पूर्ण करेंगे । तुझे जो भी चाहे वह भगवान से ही मांगना ।" उसने सेवा पूजा करके भगवान को प्रसन्न कर लिया । भगवान प्रगट होकर बोले - 'बोल तेरी क्या इच्छा है ?' वह बोली - मैंने पति का सुख नहीं देखा सो आपसे चाहती हूँ । भगवान ने भी उसके भाव के अनुसार ही किया । उसके गर्भ रह गया और उससे प्रसिद्ध भक्त नामदेवजी जन्मे। इससे सूचित होता है कि पति भाव की भक्ति नारी को भगवान पुत्र भी देते हैं ।
सुपति भाव के भक्त को, सुत भी दे भगवान ।
दिया पुत्र भगवान ने, नाम देव मतिमान ॥२८२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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