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*सब घट एकै आत्मा, जानै सो नीका ।*
*आपा पर में चीन्ह ले, दर्शन है पीव का ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ दया निर्वैरता का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु* *पितृ भक्ति*
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महात्मा ईसा पितृ भाव के उपासक थे । जब यहूदी लोगों ने उन्हें सूली पर चढाया तब उन्होंने परम पिता परमेश्वर से हाथ जोड़ कर प्रार्थना की - "प्रभो ! इन लोगों को क्षमा कीजिये । ये बेचारे नहीं जानते कि हम क्या कर रहे हैं ।" फिर अन्त में "हे पिता ! यह आत्मा आपके अर्पण है ।' यह कहते हुये अपने प्राण त्याग दिये । इससे सूचित होता है कि पितृ भाव का भक्त दूसरों के दोष न देख कर, अपने को भगवान के समर्पण कर देता है ।
पितृ भक्त पर दोष तज, प्रभु के अर्पण होय ।
ईसा ने याची क्षमा, जोड़ निजी कर दोय ॥२७२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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