गुरुवार, 28 मई 2020

(२८)

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*निशिवासर मोहन तन मेरे,* 
*चरण कँवल मन जानै ।*
*निधि निरख देख सचु पाऊँ,* 
*दादू और न जानै ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद्यांश. ३४३)*
=================
*राघवयादवीयम्* ~ लेखक *श्री वेंकटाध्वरी*
साभार सौजन्य ~ मुदित मिश्र विपश्यी(हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद)
अंग्रेजी अनुवाद ~ डा. सरोजा रामानुजम, M.A., Ph.d, Siromani in Sanskrit
.
(२८)
*श्री रामलीला*(अनुलोम)
हारिसाहसलंकेनासुभेदीमहितोहिसः ।
चारुभूतनुजोरामोरमाराधयदार्तिहा ॥२८॥
चमत्कारिक रूप से साहसी उस राम द्वारा रावण के प्राण हरने पर देवताओं ने उनकी स्तुति की, वे रूपवती भूमिजा सीता के संग हैं, तथा शरणागतों का कष्ट निवारण करते हैं ॥२८॥
Rama, who took away the life of Ravana, the astoundingly adventurous, who was the Lord of Seetha, the beautiful daughter of the earth, and who destroyed the grief of the one who resorted to him (Vibheeshana) was honoured by all devas.(28) 
.
(२८) 
*श्री कृष्णलीला*(विलोम)
हार्तिदायधरामारमोराजोनुतभूरुचा ।
सहितोहिमदीभेसुनाकेलंसहसारिहा ॥२८॥
वे, प्रद्युम्न को युद्ध के कष्टों से उबारने के पश्चात लक्ष्मी को निज वक्षस्थली रखने वाले, कीर्तियों के शरणस्थल जो प्रद्युम्न के हितैषी कृष्ण, ऐरावत वाले स्वर्गलोक को जीत कर पृथ्वी को वापस लौट आए ॥२८॥
Krishna, who cared for the welfare of Pradhyumna vanquished the enemies in the heaven, which had riotous elephant like Iravatha, with his valour and returned to earth.(28)
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें