🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*श्री दादू अनुभव वाणी, द्वितीय भाग : शब्द*
*राग टोडी(तोडी) १६ (गायन समय दिन ६ से १२)*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
२७८ - ब्रह्म योग ताल
जाइ रे तन जाइ रे ।
जन्म सुफल कर लेहु राम रमि,
सुमिर सुमिर गुण गाइ रे ॥टेक॥
नर नारायण सकल शिरोमणि,
जन्म अमोलक आइ रे ।
सो तन जाइ जगत नहिं जानै,
सकै तो ठाहर लाइ रे ॥१॥
जरा काल दिन जाइ गरासै,
तासौं कुछ न बसाइ रे ।
छिन छिन छीजत जाइ मुग्ध नर,
अंत काल दिन आइ रे ॥२॥
प्रेम भगति साधु की संगति,
नाम निरन्तर गाइ रे ।
जे शिर भाग तो सौंज१ सुफल कर,
दादू विलम्ब न लाइ रे ॥३॥
अरे प्राणी ! मैं तुझे बारम्बार कह रहा हूं - इस मानव देह के श्वास विषयों में लग कर व्यर्थ जा रहे हैं, तू बारम्बार राम का स्मरण और गुण - गान करते हुये, उस राम में अभेद रूप से रमण करके अपना मनुष्य जन्म सफल कर ले ।
.
नर शरीर सब शरीरों में श्रेष्ठ और नारायण की प्राप्ति का हेतु है, अत: यह जन्म अमूल्य है, वही तन विषय - उपभोग में व्यर्थ जा रहा है । सँसारी प्राणी इस बात को नहीं जानते । जहां तक हो सके इसे शीघ्र ही भजन द्वारा अपने वास्तविक स्थान प्रभु के स्वरूप में ही लगा ।
.
वृद्धावस्था इसकी सुन्दरता को तथा काल इसकी आयु के दिनों को ग्रास करता जा रहा है । उस पर तेरी शक्ति कुछ भी काम न देगी । मूर्ख नर ! यह शरीर क्षण २ में क्षीण होता जा रहा है । इस प्रकार अन्त का दिन आ जायगा ।
.
यदि तू मनुष्य शरीर प्राप्ति से अपना अच्छा भाग्य मानता है, तब तो सँतों की संगति तथा निरन्तर भगवान् का नाम गायन करते हुये प्रेमाभक्ति करके इस नर जन्म रूप सामग्री१ को सफल बनाने में देर मत कर ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें