मंगलवार, 26 मई 2020

(२६)


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*दादू जिन को सांई पाधरा, तिन बंका नांही कोइ ।*
*सब जग रूठा क्या करै, राखणहारा सोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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*राघवयादवीयम्* ~ लेखक *श्री वेंकटाध्वरी*
साभार सौजन्य ~ मुदित मिश्र विपश्यी(हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद)
अंग्रेजी अनुवाद ~ डा. सरोजा रामानुजम, M.A., Ph.d, Siromani in Sanskrit
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(२६)
*श्री रामलीला*(अनुलोम)
सागरातिगमाभातिनाकेशोसुरमासहः ।
तंसमारुतजंगोप्ताभादासाद्यगतोगजम् ॥२६॥
समुद्र लांघ कर सहयाद्री पर्वत तक जा समुद्र तट तक पहुँचने वाले की प्राप्ति दूत हनुमान के रूप में होने से, इंद्र से भी अधिक प्रतापी, असुरों की समृद्धि को असहनशील, उस रक्षक राम की कीर्ति में वृद्धि हो गई ॥२६॥
Rama, whose glory excelled that of indra. Who could not tolerate the asuras prospering, who is the protector, shone having got Hanuman, who acquired the fame of crossing the ocean and reached the sahaydri mountain and the shore of the ocean .(26)
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*श्री कृष्णलीला*(विलोम)
जंगतोगद्यसादाभाप्तागोजंतरुमासतं ।
हस्समारसुशोकेनातिभामागतिरागसा ॥२६॥
जो गदाधारी हैं, अपरिमित तेज के स्वामी हैं, वो कृष्ण – प्रद्युम्न को दिए कष्ट से अत्यधिक कुपित हो – स्वर्ग में उत्पन्न वृक्ष को झपट कर विजयी हुए ॥२६॥
Enraged by the wrong committed by causing grief to Pradhyumna, Krishna, whose glory is unabated, who was armed with the mace, became victorious grasping the celestial tree.(26)
(क्रमशः)

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