शुक्रवार, 22 मई 2020

(२२)

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू क्या बल कहा पतंग का, जलत न लागै बार ।*
*बल तो हरि बलवंत का, जीवै जिहिं आधार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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*राघवयादवीयम्* ~ लेखक *श्री वेंकटाध्वरी*
साभार सौजन्य ~ मुदित मिश्र विपश्यी(हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद)
अंग्रेजी अनुवाद ~ डा. सरोजा रामानुजम, M.A., Ph.d, Siromani in Sanskrit
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(२२)
*श्री रामलीला*(अनुलोम)
भारमाकुदशाकेनाशराधीकुहकेनहा ।
चारुधीवनपालोक्या वैदेहीमहिताहृता ॥२२॥
लक्ष्मी जैसी तेजस्वी का, अंत समय आसन्न होने के कारण नीच दुष्ट छली नीच राक्षस(रावण)द्वारा, उच्च विचारों वाले वनदेवताओं के सामने ही उस सर्वपूजिता सीता का अपहरण कर लिया गया ॥२२॥
Seetha, lustrous like Lakshmi and revered by all, was taken away by Ravana, who descended into a degrading state, being wicked and cunning, while the good forest gods looked on.(22)
(२२) 
*श्री कृष्णलीला*(विलोम)
ताहृताहिमहीदेव्यैक्यालोपानवधीरुचा ।
हानकेहकुधीराशानाकेशादकुमारभाः ॥२२॥
तब, एक ब्राह्मण की मैत्री से उस लुप्त अविनाशी, चिरस्थायी ज्ञान व तेज को पुनर्प्राप्त कर नाकेश(स्वर्गराज, इंद्र) – जिनकी इच्छा पलायन करनेवाले देवताओं की रक्षा करने की थी – ने आकुल कुमार प्रद्युम्न का प्रताप हर लिया ॥२२॥
The glory of Pradhumna was eclipsed by Indra, who was aided by a brahmin and got back his valour and lustre in order to protect the fleeing devas.(22)
(क्रमशः)

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