रविवार, 31 मई 2020

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*करणहार कर्त्ता पुरुष, हमको कैसी चिंत ।*
*सब काहू की करत है, सो दादू का दादू मिंत ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्‍वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *दास्य भक्ति*
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अग्रदासजी के शिष्य प्रयागदासजी को दो गांवों से निमंत्रण आया था । एक में मंदिर पर कलश और दूसरे पर ध्वजा चढाने का उत्सव एक ही दिन में एक ही समय पर था । प्रयागदासजी दोनों में ही जाना चाहते थे । उनकी भावना पूर्ण करने के लिये भगवान ने उनके दो देह बना दिये । दोनों ही स्थानों में उन्होंने अपने हाथों कलश और ध्वजा चढाई । इससे सूचित होता है कि दास भक्त की भावना भगवान पूर्ण करते हैं ।
दास भक्त की भावना, सहज पूर्ण हो जाए ।
दो तन प्रयागदास के, हुये किये कृत जाय ॥१७४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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