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*दादू कहाँ लीन शुकदेव था, कहाँ पीपा, रैदास ।*
*दादू साचा क्यों छिपै, सकल लोक प्रकास ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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एक समय ज्ञानदेव और नामदेव के संग विट्ठल भगवान कूर्मदास से मिलने जा रहे थे । साँवता के गांव अरण भेंडी के समीप आये तब भगवान ने कहा - "तुम लोग यहाँ ही ठहरों मैं साँवता से मिल कर आता हूँ । साँवता के पास जाकर बोले - "तुम मुझे शीध्र छिपा दो, दो चोर मेरे पीछे लगे हैं ।" साँवता ने खुरपे से अपना पेट चीरा और उसमें भगवान को छीपा लिया और ऊपर से चाद्दर ओढ ली । भगवान नहीं आये तब ज्ञानदेव और नामदेव साँवता के पास जाकर बोले - 'भैया भगवान के दर्शन करा दे ।' साँवता ने भगवान् को पेट से बाहर निकाल दिया । यह देखकर साँवता की महा महिमा का ज्ञान सब को हो गया । इससे सूचित होता है कि भक्तों को भगवान ही प्रगट करते हैं ।
भक्तों को भगवान ही, करते है प्रख्यात ।
किया साँवता को प्रगट, कूर्मदास के जात ॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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