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*दादू सिरजनहारा सबन का, ऐसा है समरत्थ ।*
*सोई सेवक ह्वै रह्या, जहँ सकल पसारैं हत्थ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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भक्तों का योग(अप्राप्त की प्राप्ति) क्षेम(प्राप्त की रक्षा) भगवान ही करते हैं । श्रीधर नामक एक भक्त तीर्थ यात्रा करने निकले थे । मेड़ता नगर के समीप उनके साथ चोर लग गये । जिस समय वे श्रीधर को लूटने लगे तब स्वयं भगवान मेड़ता नरेश जयमलजी के रूप में शस्त्र धारण किये तथा घोड़े पर चढे हुये प्रकट होकर चोरों को ललकारा चोर प्राण लेकर भाग गये । इस प्रकार श्रीधरजी के धन की तथा प्राणों की रक्षा करके भगवान ने उनका क्षेम किया । सुदामाजी को अपार धन देकर उनका योग किया, यह कथा प्रसिद्ध है । इससे सूचित होता है कि भक्तों का योग क्षेम भगवान ही करते हैं ।
योग क्षेम निज भक्त का, करे सदा भगवान ।
श्रीधर की रक्षा करी, सुदामा को धनदान ॥३९४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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