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*गुरु दादू और कबीर की, काया भई कपूर ।*
*रज्जब अज्जब देखिया, सर्गुण निर्गुण नूर ॥*
*(श्री रज्जब वाणी)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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वल्लभाचार्यजी का शरीर काशी में हनुमान घाट पर स्नान करते - करते उंचा उठकर आकाश में लीन हो गया था । और दादूजी तथा कबीरजी के शरीरों के स्थान में केवल पुष्प मिले थे शरीर नहीं । इससे सूचित होता है कि श्रेष्ठ भक्तों के शरीर भी कपूर के समान हो जाते हैं ।
श्रेष्ठ भक्तों के देह भी, कपूर सम हो जात ।
वल्लभ दादु कबीर के, हो गये अति प्रख्यात ॥३६९॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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