शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*मन मृगा मारै सदा, ताका मीठा मांस ।*
*दादू खाइबे को हिल्या, तातैं आन उदास ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ मन का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *लोभ निरूपण*
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वर्षाती नदी का पानी चढ रहा था । उसके वेग में एक रीछ बहा जा रहा था । तटपर खड़े मनुष्यों ने उसे कम्बल समझा । उनमें से एक तैराक मनुष्य कम्बल के लोभ में आकर नदी में उतर के रीछ के समीप गया कि रीछ ने उसे पकड़ लिया और वह मारा गया ।
लहे लोभ से ही आप ही, मनुज मृत्यु की त्रास ।
कम्बल हित सरिता धुसा, हुआ रीछ से नाश ॥३८॥

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