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*दादू मोह संसार को, विहरै तन मन प्राण ।*
*दादू छूटै ज्ञान कर, को साधु संत सुजाण ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *काम*
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एक राजकन्या राजा जगदेव पर कामासक्त हुई । विवाह का प्रस्ताव रखा, किन्तु जगदेव ने स्वीकार नहीं किया । कन्या की माता ने किसी बहाने से जगदेव को अपने नगर में बुलाया और मंत्रियों के द्वारा समझाया। किन्तु राजा न माना । लड़की ने भी अपनी काम वेदना प्रकट की, परन्तु जगदेव तो कामासक्त से संबंध करना उचित नहीं समझते थे । इससे किसी प्रकार भी उसने स्वीकार नहीं किया ।
अन्त में उस दुष्ट लड़की ने जगदेव का मुख देखने के लिये उसका सिर कटवा मंगाया । परन्तु फिर भी भगवान ने उसकी टेक रख ली । वह मृतक सिर लड़की के सन्मुख भी नहीं हुआ, जब लड़की मुख को अपनी और करे तब उसी क्षण सिर फिर जाय, ऐसा कई बार हुआ ।
कामी जन को सुजन जन, मुख भी नहीं दिखात ।
मृतक शीश जगदेव का, फिर प्रगट है बात ॥२४॥

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