रविवार, 30 अगस्त 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*काल कुहाड़ा हाथ ले, काटन लागा ढाइ ।*
*ऐसा यहु संसार है, डाल मूल ले जाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निगुणा का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *ईर्ष्या*
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वृहस्पतिजी के बड़े पुत्र कच देवताओं की प्रार्थना से शुक्राचार्य के पास संजीवनी विद्या सीखने गये थे । यह बात जब दानवों को ज्ञात हुई तब वे कच को मारने के प्रयत्न में लगे और तीन बार मार डाला । एक बार मारकर भेड़ियों को खिला दिया । दूसरी बार भी किया । तीसरी बार जलाकर उसकी भस्म मदिरा में मिला, शुक्राचार्य को पिला दी । तीनों ही बार शुक्राचार्य ने अपनी संजीवनी विद्या से उन्हें जीवित कर लिया था ।
ब्रह्महत्या भी करत है, ईर्ष्या वश भव मांहिं ।
तीन बार कच को हता, बात छिपी यह नांहिं ॥२१७॥

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