🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू सतगुरु ऐसा कीजिये, राम रस माता ।*
*पार उतारे पलक में, दर्शन का दाता ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *गुरु निरुपण*
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नरसिंह के पुत्र राजा जयन्तपाल अपने राज्य में कोई विद्वान व साधु आता, उसे अपनी सभा में बुलाकर, यह प्रश्न करते कि - "आप ब्रह्मज्ञान की बातें करते है पर क्या आपने ब्रह्म का साक्षात्कार किया है ? और किया है तो क्या वैसा साक्षात्कार मुझे भी करा सकते हैं ? केवल शब्द ज्ञानी इसका क्या उत्तर देते । साक्षात्कार नहीं कराने पर वह उसे कारागार में बंद करा देता था । ५००-६०० साधु व ब्राह्मण राजा के कारागृह में थे ।
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श्री रधुनाथ के शिष्य मुकन्दराज, उन्हें छुड़ाने की इच्छा करके जयन्तपाल के पास गये । उनसे भी वही प्रश्न किया । मुकन्दराज ने कहा - "यदि तुम साक्षात्कार करना चाहते हो तो जहां कहो वहां ही साक्षात्कार करा दूँ ।" यह कहकर एक घोड़ा मंगवाकर राजा से चढने को कहा ।
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राजा ने घोड़े पर चढने के लिये, पागड़े में पैर रखा त्यों ही मुकन्दराज ने राजा के शिर पर हाथ रखा । घोड़े पर सवार होते ही राजा की समाधि लग गई । तीन दिन रात राजा घोड़े पर ही सवार रहा, समाधि खुलने पर मुकन्दराज का ही शिष्य हो गया और साधु-ब्राह्मण को मुक्त कर सम्मान पूर्वक विदा कर दिया ।
कृपा करें गुरदेव यदि, क्षण में हो साक्षात ।
मुकन्द ने करवा दिया, जयन्त को विख्यात ॥४॥

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