🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू औगुण गुण कर माने गुरु के, सोई शिष्य सुजाण ।*
*सतगुरु औगुण क्यों करै, समझै सोई सयाण ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *शिष्य निरुपण*
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आँमेर नगर में एक संत का युवक शिष्य था । उसको उसका गुरु बहुत ताड़ना दिया करता था । एक दिन संत रज्जब ने उसकी परीक्षा लेने के लिये कहा - "भाई ! तेरे गुरु तुझे बिना कारण ही ताड़ना दिया करते है तथा उनसे तुझे कुछ लाभ भी नहीं हुआ है । इसलिये उन्हें छोड़ दे और हमारे पास आ जा ।"
युवक ने कहा - "भगवन ! आपका कहना तो ठीक ही है किन्तु गुरु तो ताड़ना देते हैं वे मेरी भलाई के निमित ही देते हैं । गुरु में मुझे कुछ भी दोष नहीं दीखता । जो कमी है सो मेरी ही है, इसलिये आप कृपा करें, फिर ऐसा नहीं कहना ।" युवक की बात सुनकर संत रज्जब बड़े प्रसन्न हुए और उसके सिर पर हाथ रखकर उसे तत्ववित बना दिया ।
दोष दृष्टि गुरु में न करे, वे हों शिष्य महान ।
रज्जब ने शिर हाथ दे, बना दिया मतिमान ॥४९॥

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