बुधवार, 19 अगस्त 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*दादू निन्दा किये नरक है, कीट पड़ैं मुख मांहि ।*
*राम विमुख जामै मरै, भग-मुख आवै जाहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निन्दा का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक ब्राह्मण की पुत्री के एक पुरुष को रात्रि में दूसरे के घर जाते देखकर उसके विषय में दूसरों को अनुचित बात कही । दूसरे दिन सहसा उसके मुख से कीड़े पड़ने लगे । यह देखकर उसके तपस्वी पिता ने कहा - "तुने अवश्य किसी की निन्दा की होगी ।" लड़की ने स्वीकार कर लिया । आयसा ने एक स्त्री को बोना की स्त्री कहा था इतने मात्र से उसके मुख से रक्त निकलता था ।
निन्दा से मुख में पड़े, कीड़े रक्त सुजान ।
आयास रू द्विज सुता की, कहते कथा महान ॥२०७॥

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