मंगलवार, 25 अगस्त 2020

= ३५५ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*#श्रीदादू०अनुभव०वाणी, द्वितीय भाग : शब्द*
*राग सूहा २२(गायन समय दिन ९ से १२)*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
.
३५५ - **परिचय ।** पँजाबी त्रिताल
अब हम राम सनेही पाया, 
आगम अनहद सों चित लाया ॥टेक॥
तन मन आतम ताको दीन्हा, 
तब हरि हम अपना कर लीन्हा ॥१॥
वाणी विमल पँच पराँनाँ, 
पहली शीश मिले भगवाँनाँ ॥२॥
जीवित जन्म सफल कर लीन्हां, 
पहली चेते तिन भल कीन्हां ॥३॥
अवसर आपा ठौर लगाया, 
दादू जीवित ले पहुँचावा ॥४॥
साक्षात्कार सम्बन्धी विचार प्रकट कर रहे हैं - अब हमने अनाहत शब्द श्रवण में चित्त लगाकर शास्त्र - प्रतिपाद्य अपने प्रेम - पात्र राम को प्राप्त कर लिया है । 
.
प्रथम हमने अपना तन मनादि सर्वस्व समर्पण किया है, तब उन हरि को हमने आत्म स्वरूप करके प्राप्त किया है । 
.
जिनने अपनी वाणी, पँच ज्ञानेन्द्रिय, मन और प्राणों को विमल करके पहले उन भगवान् को अपना सर्वस्व समर्पण किया है,
.
उन्होंने जीवितावस्था में ही अपना जन्म सफल किया है । जो पहली अवस्था में ही सावधान हो गये हैं उन्होंने बहुत अच्छा किया है 
.
क्योंकि ठीक समय पर अपने जीवत्व अहँकार रूप शिर को भगवत् के समर्पण करके जीवितावस्था में ही विवेक द्वारा अपने आत्मा को असत्य से उठाकर सत्य परब्रह्म के स्वरूप में पहुंचा दिया है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें