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🦚 *#श्रीसंतगुणसागरामृत०२* 🦚
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स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
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*(“तृतीयोल्लास” ४०/४२)*
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*सबही के दी पछाड़, भागे बचे हुये*
बो वाके, वो वाके आगै, हस्ती देख सवै को भागे ।
आगे सब ही लार गयंदू, भये उदास गहै ज्यूं चंदू ॥४०॥
हाथी को देखकर नौकर व सैनिक वो उससे आगे भाग रहा है और वो उससे आगे भाग रहा है इस प्रकार भागम भाग लग गई । आगे आगे सैनिक और नौकर भाग रहे हैं और पीछे पीछे हाथी भाग रहे थे, सभी लोग इस प्रकार उदास हो रहे थे जैसे ग्रहण लगने से चन्द्रमा उदास हो जाता है ॥४०॥
त्राहि त्राहि भाखे सब कोई, ज्यूं धरम राइ पुरी में होई ।
कृपा करी हरि आज्ञा दीन्ही, तुम्ह भाई सोई हम कीन्ही ॥४१॥
सब कहने लगे बचाओ-बचाओ जिस तरह धर्मराज की नगरी में हाहाकार होता है । तब हरि ने आज्ञा दी कि इन पर कृपा करो । दोनों ने कहा जो हरि को अच्छा लगे सोई काम हम करेंगे ॥४१॥
छाड़ि गयंद कौ आहि सरीरा, देखि दुखी जिय ऊपजी पीरा ।
‘सत्यराम’ करि राव जगायो, उठ्यौ ब्राह्मण बहुत लजायौ ॥४२॥
राजा नौकर सैनिक आदि को दुखी देख कर संतों ने कृपा करके हाथी का शरीर छोड़ दिया और मानव रूप धारण कर लिया एवं सत्यराम कहकर राजा को जगाया और साथ ही ब्राह्मण भी उठकर बहुत लज्जित हुआ ॥४२॥
(क्रमशः)

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