🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *#श्री०रज्जबवाणी* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू होना था सो ह्वै रह्या, और न होवै आइ ।*
*लेना था सो ले रह्या, और न लिया जाइ ॥*
===========================
*श्री रज्जबवाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ @महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*वक्त ब्यौरा का अंग १२२*
.
सारंग१ चाहै स्वाति को, दामिनि२ दग्ध्या गात ।
रज्जब कहिये कौन को, इन वक्तों३ की बात ॥२५॥
चातक१ पक्षी स्वाति बिन्दु को चाहता है और उसका शरीर बिजली२ से जल जाता है, कहो ? इस समय३-कुसमय की बात किसको कहैं ?
.
आभा१ तल२ वोडे३ अहर४, सारंग५ स्वातिहि जानि ।
असणी६ अभागों वोसरे७, तहां सु तन की हानि ॥२६॥
नीचे२ के बादल१ रूप होठों४ से रुके३ हुये स्वाति जल को जानकर चातक५ पक्षी उधर जाता है किन्तु दुर्भाग्य वश जल न बर्ष कर बिजली६ वर्ष७ जाती है अर्थात गिर जाती है और वहां उसका शरीर नष्ट हो जाता है, यह समय की ही बात है ।
.
हांडी सौं भाँडी१ भई, छूंकत लागी आग ।
जील करतों जलि मुये, अइया२ भूंडे३ भाग ॥२७॥
हांडी में शाक छूंकते समय अग्नि की ज्वाला निकल कर छप्पर में अग्नि लग गई, समय अच्छा नहीं होता तब भलाई से भी बुराई१ हो जाती है । देखो, जीवन का उपाय करते समय भी जलकर मर गये, यही२ बुरे३ भाग्य की पहचान है ।
.
अइया१ अभागी ऊँदरा२, करंड काटने जाय ।
कै बखत३ बली बाती गहै, जासौं लागे लाय ॥२८॥
यह१ दुर्भाग्य चूहा२, सर्प का करंड काटने जाता है तब सर्प का भोजन बनता है और दुर्भाग्य पूर्ण समय३ की प्रबलता से जलते हुये दीपक की बत्ती लेकर छप्पर में जाता है, जिससे अग्नि लगकर अपने कुटुम्ब के सहित आप भी मर जाता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें