बुधवार, 19 अगस्त 2020

*आत्मदर्शन का उपाय । नित्यलीला-योग*

🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीरामकृष्ण०वचनामृत* 🌷
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*दादू निराकार मन सुरति सौं, प्रेम प्रीति सौं सेव ।*
*जे पूजे आकार को, तो साधु प्रत्यक्ष देव ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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*साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)*
*साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ*
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*परिच्छेद ४३* 
*बलराम के मकान पर* 
श्रीरामकृष्ण ने आज कलकत्ते में बलराम के मकान पर शुभागमन किया है । मास्टर पास बैठे हैं, राखाल भी हैं । श्रीरामकृष्ण भावमग्न हुए हैं । आज ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी, सोमवार, २५ जून १८८३, ई. । समय दिन के पाँच बजे का होगा ।
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श्रीरामकृष्ण(भाव के आवेश में)- देखो, अन्तर से पुकारने पर अपने स्वरूप को देखा जाता है, परन्तु विषयभोग की वासना जितनी रहती है, उतनी ही बाधा होती है ।
मास्टर- जी, आप जैसा कहते हैं, डूबकी लगाना पड़ता है ।
श्रीरामकृष्ण(आनन्दित होकर)- बहुत ठीक ।
सभी चुप है; श्रीरामकृष्ण फिर कह रहे हैं । 
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श्रीरामकृष्ण(मास्टर के प्रति)-देखो सभी को आत्मदर्शन हो सकता है ।
मास्टर- जी, परन्तु ईश्वर कर्ता हैं; वे अपनी इच्छानुसार भिन्न भिन्न प्रकार से लीला कर रहे हैं । किसी को चैतन्य दे रहे हैं, किसी को अज्ञानी बनाकर रखा है ।
श्रीरामकृष्ण- नहीं, उनसे व्याकुल होकर प्रार्थना करनी पड़ती है । आन्तरिक होने पर वे प्रार्थना अवश्य सुनेंगे ।
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एक भक्त- जी हाँ, ‘मैं’ है, इसलिए प्रार्थना करनी होगी ।
श्रीरामकृष्ण(मास्टर के प्रति)-लीला के सहारे नित्य में जाना होता है – जिस प्रकार सीढ़ी पकड़-पकड़कर छत पर चढ़ना होता है । नित्यदर्शन के बाद नित्य से लीला में आकर रहना होता है, भक्ति-भक्त लेकर यही मेरा परिपक्व मत है । “उनके अनेक रूप, अनेक लीलाएँ हैं । ईश्वर-लीला, देव-लीला, नर-लीला, जगत्-लीला । वे मानव बनकर, अवतार होकर युग युग में आते हैं – प्रेम-भक्ति सिखाने के लिए । देखो न चैतन्यदेव को । अवतार द्वारा ही उनके प्रेम तथा भक्ति का आस्वादन किया जा सकता है । उनकी अनन्त लीलाएँ हैं – परन्तु मुझे आवश्यकता है प्रेम तथा भक्ति की । मुझे तो सिर्फ दूध चाहिए । गाय के स्तनों से ही दूध आता है । अवतार गाय के स्तन हैं ।”
क्या श्रीरामकृष्ण कह रहे हैं कि वे अवतीर्ण हुए हैं, उनका दर्शन करने से ही ईश्वर का दर्शन होता है ? चैतन्यदेव का उल्लेख कर क्या श्रीरामकृष्ण अपनी ओर संकेत कर रहे हैं ?
(क्रमशः)

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